Friday, October 3, 2008

ब्‍लॉग जगत में कुमार अंबुज का स्‍वागत है...

हिंदी कवि कुमार अंबुज भी अब ब्‍लॉग जगत में आ गए हैं. नवें दशक में कविता की जो पीढ़ी आई, उसमें कुमार अंबुज मुझे सबसे गहरे कवि के रूप में दिखते हैं, प्रभावित करते हैं और प्रेरित करते हैं.
'कुमार अंबुज' नाम से ही अपना ब्‍लॉग, उन्‍होंने कुछ दिनों पहले बनाया था, लेकिन उस पर विधिवत पोस्‍ट आज डाली है. उसे यहां पढि़ए और उनका स्‍वागत कीजिए.
अब पढि़ए उनकी एक कविता-


कोई है मांजता हुआ मुझे

कोई है जो मांजता है दिन-रात मुझे
चमकाता हुआ रोम-रोम
रगड़ता
ईंट के टुकड़े जैसे विचार कई
इतिहास की राख से
मांजता है कोई

मैं जैसे एक पुराना तांबे का पात्र
मांजता है जिसे कोई अम्‍लीय कठोर
और सुंदर भी बहुत
एक स्‍वप्‍न कभी कोई स्‍मृति
एक तेज़ सीधी निगाह
एक वक्रता
एक हंसी मांजती है मुझे

कर्कश आवाज़ें
ज़मीन पर उलट-पलटकर रखे-पटके जाने की
और मांजते चले जाने की
अणु-अणु तक पहुंचती मांजने की यह धमक
दौड़ती है नसों में बिजलियां बन
चमकती है

धोता है कोई फिर
अपने समय के जल की धार से
एक शब्‍द मांजता है मुझे
एक पंक्ति मांजती रहती है
अपने खुरदरे तार से.

(कुमार अंबुज के चौथे संग्रह 'अतिक्रमण' से).

15 comments:

ravindra vyas said...

यार कितना सुंदर डिजाइन किया है। और क्या सुंदर कविता लगाई है।
जिअो प्यारे।

anurag said...

ambuj ji ka abhinandan...isse un logon ko kuch sadma zaroor lagega jo blog ko ab bhi halke-phulke dhang se le rhe hain...

Mohan Vashisth said...

सर्वप्रथम तो आपको एक बेहतरीन कला, ब्‍लाग की साज-सज्‍जा के लिए बधाई देखकर लगा कि वाकई दिवाली आने को है और अंबुज जी का भी अभिनन्‍दन इस ब्‍लाग जगत में

ANIL YADAV said...

सुंदर है डिजाइन। फोटो में कुमार साहब भी चकित लग रहे हैं। धन्यवाद।

महेन said...

सुआगत है। सुआगत है।
फ़ोटो में एक ओर कोई धार्मिक किताब और दूसरी ओर कम्प्युटर कुल मिलाकर कविता के जैसे ही चकित कर रहे हैं।

मोहन वशिष्‍ठ said...

sir your blog looking so gooooood very nice blog and its contents too. and wellcome to mr. Ambuj Ji regard

Ek ziddi dhun said...

`धोता है कोई फिर
अपने समय के जल की धार से
एक शब्‍द मांजता है मुझे
एक पंक्ति मांजती रहती है
अपने खुरदरे तार से.`

Ashok Pande said...

स्वागत है!

Arun Aditya said...

स्वागत है!
स्वागत है!!
स्वागत है!!!

varsha said...

कोई है जो मांजता है दिन-रात मुझे ..
क्या बात है

Ganesh said...

कुमारजी बधाई हो! अब आप की नयी पोस्ट्स का इंतज़ार रहेगा...
गणेश विसपुते, पुणे.

विजयशंकर चतुर्वेदी said...

स्वागत है कुमार जी का... और तुम्हें बधाई ब्लॉग की नई साज-सज्जा के लिए!

अशोक कुमार पाण्डेय said...

क्या बात है गीत भाई ! शानदार कविता और अद्भुत प्रेजेंटेशन ! बधाई।अम्बुज जी का स्वागत
समय मिले तो हमारा ब्लॉग देखें
www.naidakhal.blogspot.com

Anonymous said...

kya kar rahe ho bhai.itna sundar blog.tatai ke tai maja hai bhai.
Bahadur Patel
mo.09827340666

Anonymous said...

KYA BAAT HAI BHAI.ITANA SUNDAR BLOG. TATAI KE TAI KYA BAAT HAI BHAI.
BAHADUR PATEL
09827340666